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महावीर मन्दिर को जानबूझकर बदनाम करने की सोची-समझी साजिश

एक Activist ने जो यह tweet  किया है कि ‘महावीर मन्दिर में बहुजनों से चढ़ाये चंदे से पटना में ब्राह्मण/भूमिहार के लिए निःशुल्क आवासीय शिक्षण संस्थान खोले जा रहे हैं’ वह झूठ का पुलिन्दा है और महावीर मन्दिर को जानबूझकर बदनाम करने की सोची-समझी साजिश है। उन्हें यह जानना चाहिए कि महावीर मन्दिर, पटना देश का पहला बड़ा मन्दिर है, जिसने 13 जून, 1993 को रविदास समाज के व्यक्ति को इस मन्दिर में पुजारी बनाया और आज भी फलाहारी श्री सूर्यवंशी दास इस महावीर मन्दिर में पुजारी हैं। इस मन्दिर के मुख्य व्यास और कथावाचक श्री निरंजन भगत कुम्हार जाति के हैं और प्रतिदिन मन्दिर में प्रवचन करते हैं। इस मन्दिर में बहुत-सारे कर्मचारी वंचित वर्ग से हैं। फिर भी, ऐसी टिप्पणी महावीर मन्दिर को बदनाम करने के लिए जानबूझकर की गयी प्रतीत होती है।

                        ब्रह्मजन के लिए निःशुल्क आवासीय शिक्षण संस्थान खोलने की योजना यदि किसी की है, तो उससे महावीर मन्दिर का प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई सरोकार नहीं है। महावीर मन्दिर ने समाज के सभी वर्गों को सदैव अपनी परोपकारी संस्थाओं से सहयोग प्रदान किया है। इसके द्वारा स्थापित सभी अस्पतालों में जाति या धर्म का भेद-भाव किये बिना सबको पूरी सुविधा प्रदान की जाती है। महावीर मन्दिर की ओर से साल में एक ही शोभायात्र निकाली जाती है और वह है सन्त रविदास जयन्ती के अवसर पर। इस मन्दिर में आरती के बाद जो जयकारा लगता है, उसमें एक है ‘जात पाँत पूछै नहीं कोय। हरि को भजै से हरि को होय।’                    

                        किशोर कुणाल ने तीन खण्डों में ‘दलित-देवो भव’ पुस्तक लिखी है_ जिसके दो खण्ड (करीब 1500 पेज) ‘प्रकाशन विभाग’ द्वारा करीब दस साल पहले छप चुके हैं। तीसरा खण्ड छपने वाला है। परमपूज्य भारत-रत्न डाo भीमराव आम्बेडकर के साहित्य के बाद यह पुस्तक जन्मना वर्ण-व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रहार है। उस Activist को अपना नाम लोगों के बीच लाने के लिए इतने बड़े झूठ का सहारा लेकर tweet नहीं करना चाहिए जो तथ्यों के विपरीत और भ्रामक है। सत्य के पथ पर चलने वाले सभी सही व्यक्तियों को इस गलत tweet की निन्दा करनी चाहिए।

            उस Activist से अनुरोध है कि वे महावीर मन्दिर की गतिविधियों का पता कर लें और जब उन्हें यह ज्ञात हो जाये कि उन्होंने जो लिखा है, वह सरासर झूठ है, तो उस Activist को तत्काल खण्डन कर खेद प्रकट करना चाहिए और जिन लोगों तक उनका गलत tweet गया है, उन सबको सही स्थिति बतानी चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह माना जायेगा कि उन्होंने सर्वजनहित में कार्यरत इस संस्था की छवि धूमिल करने का कार्य जानबूझकर किया है और समाज में नफरत तथा तनाव पैदा करने की कोशिश की है।

(किशोर कुणाल)

सचिव महावीर मन्दिर न्यास, पटना

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